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गर्भ में संतान का स्वरूप क्या है? | वैदिक परंपरा में प्रवृत्ति का अध्ययन| any time Live discussion





गर्भ में संतान का स्वरूप | वैदिक-ज्योतिषीय अध्ययन

🕉️ गर्भ में संतान का स्वरूप

वैदिक–ज्योतिषीय अध्ययन एवं व्यक्तिगत चर्चा

भारतीय वैदिक परंपरा में गर्भ को केवल जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि
कर्म, संस्कार और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का परिणाम माना गया है।

अनेक माता-पिता यह जानना चाहते हैं कि —
गर्भ में संतान में पुत्र-तत्व या पुत्री-तत्व की प्रवृत्ति किस ओर अधिक है?


🌿 यह परामर्श किस आधार पर है?

  • माता-पिता की जन्म-तिथि (Vedic birth impression)
  • गर्भ का चंद्र मास
  • वैदिक-ज्योतिषीय तत्व संतुलन
  • शास्त्रसम्मत प्रवृत्ति (Tendency) अध्ययन
महत्वपूर्ण:
यह अध्ययन लिंग निर्धारण नहीं है, बल्कि वैदिक-दार्शनिक
discussion-based analysis है।

🕉️ इस परामर्श में आपको क्या मिलेगा?

  • ✔ व्यक्तिगत वैदिक चर्चा (One-to-One)
  • ✔ पुत्र-तत्व / पुत्री-तत्व की प्रवृत्ति पर शास्त्रीय व्याख्या
  • ✔ गर्भ-संस्कार एवं मानसिक तैयारी मार्गदर्शन
  • ✔ पूर्णतः Ethical और Legal consultation

⚖️ वैधानिक स्पष्टता (Mandatory)

❗ यह सेवा PCPNDT Act के अंतर्गत किसी भी प्रकार का
लिंग परीक्षण, पुष्टि या गारंटी नहीं देती।
यह परामर्श केवल वैदिक-ज्योतिषीय विश्वास और अध्ययन हेतु है।

🔔 Paid Vedic Consultation

यदि आप व्यक्तिगत वैदिक चर्चा में रुचि रखते हैं,
तो आप नीचे दिए गए बटन से शुल्क जमा कर सकते हैं।


📿 Pay via UPI & Book Consultation


UPI Number: 9592376621
Payment के बाद screenshot WhatsApp पर भेजें।


❓ FAQ (Frequently Asked Questions)

Q1. क्या आप गर्भ में लड़का या लड़की बताते हैं?
नहीं। हम किसी भी प्रकार का लिंग निर्धारण नहीं करते।

Q2. यह परामर्श किस प्रकार का है?
यह वैदिक-ज्योतिषीय प्रवृत्ति (tendency) पर आधारित discussion है।

Q3. क्या यह मेडिकल या वैज्ञानिक तरीका है?
नहीं। यह belief-based वैदिक अध्ययन है।

Q4. क्या यह कानूनी है?
हाँ, क्योंकि इसमें कोई लिंग जांच या दावा नहीं किया जाता।

Q5. क्या पुत्री-तत्व को नकारात्मक माना जाता है?
बिल्कुल नहीं। वैदिक दर्शन में पुत्र और पुत्री दोनों समान दिव्य आत्माएँ हैं।


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